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| Wednesday 20 August, 2008 |
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Kisi ke...
Well this is not my creation..a friend of mine on orkut scrapped me this beautiful poem...so as usual i am sharing it with my beloved ilanders.
किसी के इतने पास न जा के दूर जाना खौफ़ बन जाये एक कदम पीछे देखने पर सीधा रास्ता भी खाई नज़र आये
किसी को इतना अपना न बना कि उसे खोने का डर लगा रहे इसी डर के बीच एक दिन ऐसा न आये तु पल पल खुद को ही खोने लगे
किसी के इतने सपने न देख के काली रात भी रन्गीली लगे आन्ख खुले तो बर्दाश्त न हो जब सपना टूट टूट कर बिखरने लगे
किसी को इतना प्यार न कर के बैठे बैठे आन्ख नम हो जाये उसे गर मिले एक दर्द इधर जिन्दगी के दो पल कम हो जाये
किसी के बारे मे इतना न सोच कि सोच का मतलब ही वो बन जाये भीड के बीच भी लगे तन्हाई से जकडे गये
किसी को इतना याद न कर कि जहा देखो वोही नज़र आये राह देख देख कर कही ऐसा न हो जिन्दगी पीछे छूट जाये
ऐसा सोच कर अकेले न रहना, किसी के पास जाने से न डरना न सोच अकेलेपन मे कोई गम नही, खुद की परछाई देख बोलोगे "ये हम नही
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